समाजसेवी मणिराम महतो के निधन से फूट पड़ा दुख का सैलाब
सड़क हादसे ने छीन लिया क्षेत्र का अपना इंसान, हजारों आंखें हुईं नम; जात-पात से ऊपर उठकर गरीबों और जरूरतमंदों का बनते थे सहारा
अनगड़ा। एक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया। गौंदलीपोखर निवासी व्यवसायी एवं समाजसेवी मणिराम महतो (70) के निधन की खबर जैसे ही लोगों तक पहुंची, हर तरफ मातम पसर गया। जिस व्यक्ति ने वर्षों तक दूसरों के दुख को अपना दुख समझकर लोगों का साथ दिया, आज उसी की अंतिम यात्रा में हजारों लोग नम आंखों के साथ उन्हें विदाई देने पहुंचे।

मणिराम महतो कुछ दिन पहले रांची-मुरी मार्ग पर हाहे के पास सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गये थे। दुर्घटना के बाद परिजन उन्हें तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया था। इलाज के दौरान उनकी स्थिति लगातार नाजुक बनी रही। लेकिन जिंदगी और मौत की इस लड़ाई में आखिरकार उन्होंने दम तोड़ दिया।
उनके निधन की खबर सुनते ही परिवार, रिश्तेदारों, मित्रों और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। लोगों को विश्वास ही नहीं हो रहा था कि जो मणिराम महतो हमेशा दूसरों के लिए खड़े रहते थे, आज वही हमेशा के लिए सबको छोड़कर चले गये।
गरीबों के लिए सिर्फ मददगार नहीं, बल्कि सहारा थे मणिराम
मणिराम महतो की पहचान सिर्फ एक व्यवसायी के रूप में नहीं थी। वे क्षेत्र में समाजसेवी और जरूरतमंदों के मददगार के रूप में जाने जाते थे। किसी गरीब के घर परेशानी हो, किसी परिवार को आर्थिक संकट का सामना करना पड़े या कोई दुखी व्यक्ति मदद की उम्मीद लेकर उनके पास पहुंचे—बताया जाता है कि वे अपनी क्षमता के अनुसार मदद के लिए आगे रहते थे।
उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उन्होंने जात-पात, धर्म और सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर इंसानियत को महत्व दिया। उनके लिए जरूरतमंद की पहचान उसकी जाति नहीं, बल्कि उसकी परेशानी थी। यही वजह है कि आज उनकी अंतिम यात्रा में अलग-अलग समाज और वर्ग के हजारों लोग शामिल हुए।
कई लोगों की आंखों में आंसू थे और जुबान पर बस एक ही बात थी—
“मणिराम महतो जैसा इंसान बार-बार नहीं मिलता।”
अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
आज जब उनकी अंतिम यात्रा निकली तो पूरा क्षेत्र मानो थम सा गया। बड़ी संख्या में लोग अपने-अपने काम छोड़कर उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे। बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक और सामाजिक कार्यकर्ताओं से लेकर राजनीतिक नेताओं तक, हर कोई उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचा।
हजारों लोगों की मौजूदगी में मणिराम महतो का अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा का माहौल बेहद भावुक था। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल था। अपने प्रियजन को अंतिम विदाई देते हुए परिजनों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।
उनके साथ वर्षों से जुड़े लोगों के लिए यह पल बेहद पीड़ादायक रहा। जिनसे कल तक लोग बातचीत करते थे, जरूरत के समय सलाह लेते थे और मदद की उम्मीद रखते थे, आज वही मणिराम महतो तस्वीर बनकर सामने थे।
राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र के लोग भी पहुंचे
मणिराम महतो के अंतिम संस्कार में विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों से जुड़े कई प्रमुख लोग शामिल हुए। इनमें भाजपा के वरिष्ठ नेता सुरेंद्र महतो, JLKM नेता रामपादो महतो, मार्शल महतो, कुड़मी नेता रामनाथ महतो और विनोद महतो समेत बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता एवं स्थानीय लोग मौजूद रहे।

सभी ने दिवंगत मणिराम महतो के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया और उनके सामाजिक योगदान को याद किया।
पीछे रह गई यादें और अधूरे रिश्ते
मणिराम महतो आज भले ही इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन लोगों के बीच उनकी यादें हमेशा जिंदा रहेंगी। गरीबों की मदद करने वाला उनका स्वभाव, जरूरत के समय लोगों के साथ खड़े होने की उनकी आदत और बिना किसी भेदभाव के लोगों के लिए काम करने का उनका तरीका क्षेत्र के लोगों को लंबे समय तक याद रहेगा।
एक सड़क हादसे ने परिवार से उनका अपना छीन लिया, लेकिन उनके जाने से सिर्फ एक परिवार नहीं, बल्कि पूरा इलाका दुखी है।
आज हजारों लोगों की भीड़ उनकी लोकप्रियता की गवाही दे रही थी। अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब यह बताने के लिए काफी था कि मणिराम महतो ने लोगों के दिलों में जो जगह बनाई थी, उसे उनका जाना भी खाली नहीं कर सकता।



